घुड़खर अभयारण्य के पास 200 मेगावाट सोलर परियोजना: मंजूरियों, जमीन और ट्रांसमिशन लाइन विवाद में अधिकारियों पर सवाल
800 करोड़ रुपये की परियोजना में गौचर और सरकारी भूमि, वन स्वीकृतियों तथा ट्रांसमिशन लाइन को लेकर गंभीर प्रशासनिक सवाल; ACB कार्रवाई के बाद CEI की मंजूरियां भी चर्चा में
दिलीप पटेल
अहमदाबाद/सुरेंद्रनगर
गुजरात में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए बड़े पैमाने पर सोलर परियोजनाएं स्थापित की जा रही हैं। लेकिन सुरेंद्रनगर जिले के ध्रांगध्रा तालुका के मालवण गांव के पास स्थापित 200 मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजना अब प्रशासनिक मंजूरियों, गौचर भूमि, सरकारी जमीन, वन स्वीकृतियों और अभयारण्य क्षेत्र के निकट विकास गतिविधियों को लेकर कई सवालों के केंद्र में आ गई है।
हाल ही में गुजरात सरकार के मुख्य विद्युत निरीक्षक (Chief Electrical Inspector – CEI) के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) द्वारा दर्ज मामले के बाद सोलर परियोजनाओं को दी गई मंजूरियों और प्रक्रियाओं की भी नए सिरे से जांच की मांग उठ रही है।
ACB कार्रवाई के बाद मंजूरियों पर सवाल
31 मई 2026 को ACB ने ऊर्जा विभाग के मुख्य विद्युत निरीक्षक के खिलाफ कार्रवाई की। एजेंसी के अनुसार उनकी सरकारी कार से लगभग 5.51 लाख रुपये नकद और गिफ्ट वाउचर बरामद हुए। इसके बाद गांधीनगर और सूरत स्थित आवासों पर छापे मारे गए।
ACB के अनुसार नकदी, सोना, चांदी और अन्य मूल्यवान संपत्तियों सहित लगभग 2.64 करोड़ रुपये की संपत्ति मिली। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।
जांच में आरोप सामने आया कि सोलर परियोजनाओं को NOC और सुरक्षा प्रमाणपत्र जारी करने के बदले रिश्वत ली जाती थी तथा कुछ मामलों में अनिवार्य साइट निरीक्षण के बिना ही स्वीकृतियां दी गई थीं।
200 मेगावाट मालवण सोलर परियोजना
हरियाणा के गुरुग्राम स्थित Annecy Solar Private Limited (ASPL) ने ध्रांगध्रा के मालवण गांव में 200 मेगावाट क्षमता की सौर परियोजना स्थापित की है।
परियोजना की बिजली GETCO के 220 केवी ध्रांगध्रा GIS सब-स्टेशन तक पहुंचाने के लिए 16.875 किलोमीटर लंबी ट्रांसमिशन लाइन बनाई गई है।
गुजरात सरकार के ऊर्जा एवं पेट्रोकेमिकल्स विभाग ने विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 68(1) और 164 के तहत अनुमति प्रदान की थी।
6 सितंबर 2024 को राज्य सरकार ने धारा 164 के अंतर्गत कंपनी को टेलीग्राफ प्राधिकरण जैसी शक्तियां प्रदान की थीं, जिसके आधार पर कंपनी को निजी और सरकारी भूमि से ट्रांसमिशन लाइन ले जाने का अधिकार मिला।
घुड़खर अभयारण्य के निकट परियोजना
विवाद का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि परियोजना और इसकी ट्रांसमिशन लाइन घुड़खर अभयारण्य के निकट स्थित है।
स्थानीय प्रस्तुतियों के अनुसार परियोजना क्षेत्र और ट्रांसमिशन लाइन का हिस्सा अभयारण्य के बेहद करीब है। आरोप है कि वन्यजीव क्षेत्र से संबंधित कुछ अनिवार्य स्वीकृतियों और निगरानी प्रक्रियाओं का पूर्ण पालन नहीं किया गया।
पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि घुड़खर अभयारण्य लगातार बिजली लाइनों और औद्योगिक विकास के दबाव में आ रहा है।
गौचर और सरकारी भूमि का मुद्दा
ध्रांगध्रा के नायब कलेक्टर द्वारा भेजी गई रिपोर्ट में कई गंभीर प्रशासनिक प्रश्न उठाए गए।
रिपोर्ट के अनुसार:
- 73 पोल और टावर स्थान चिन्हित किए गए।
- कई टावर सरकारी भूमि पर स्थित पाए गए।
- कुछ स्थानों पर मंजूरी के दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे।
- कई मामलों में केवल निजी सहमति दिखाई गई।
- कुछ सर्वे नंबरों में कोई स्वीकृति उपलब्ध नहीं थी।
रिपोर्ट में गौचर भूमि पर स्थापित बिजली टावरों को लेकर भी प्रश्न उठाए गए।
परियोजना का अर्थशास्त्र
- कुल निवेश: ₹725–875 करोड़
- वार्षिक उत्पादन: 45.5 करोड़ यूनिट
- वार्षिक आय: ₹120–130 करोड़
- 25 वर्षों की संभावित आय: ₹2,730–3,410 करोड़
- CO₂ उत्सर्जन में वार्षिक कमी: 3.7–4 लाख टन
आगे क्या?
मालवण सोलर परियोजना अब केवल बिजली उत्पादन का मामला नहीं रह गई है। यह प्रशासनिक पारदर्शिता, सार्वजनिक भूमि के उपयोग, गौचर संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा और स्वीकृति प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता का प्रश्न बन चुकी है।
यदि जांच में यह साबित होता है कि सरकारी या गौचर भूमि पर नियमों के उल्लंघन के साथ टावर स्थापित किए गए, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।
ગુજરાતી
English