गुजरात मॉडल: 19 साल बाद भी मोदी का वादा अधूरा, 2 लाख आदिवासी परिवारों को पक्के घर का इंतज़ार

वादे से हकीकत तक: मोदी के आवास वादे के लगभग दो दशक बाद भी गुजरात के 2–3 लाख आदिवासी परिवार पक्के घर की प्रतीक्षा में

दिलीप पटेल

अहमदाबाद

2007 के गुजरात विधानसभा चुनाव में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने गरीब और बेघर परिवारों को घर उपलब्ध कराने का वादा किया था। 2012 के चुनाव में भी यह वादा दोहराया गया, विशेषकर आदिवासी क्षेत्रों के लिए, जहां आवास की समस्या लंबे समय से बनी हुई थी।

लगभग दो दशक बाद आवास योजनाओं के माध्यम से उल्लेखनीय प्रगति हुई है, लेकिन उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि आज भी गुजरात के आदिवासी क्षेत्रों में लगभग 2 से 3 लाख परिवार कच्चे या अर्धपक्के मकानों में रह रहे हैं और उन्हें नए घर या आवास सुधार की आवश्यकता है।

2007 के वादे से 2026 तक

भारत सरकार के आवास संबंधी आंकड़ों के अनुसार गुजरात में कुल घरों में लगभग 97–98 प्रतिशत पक्के हैं, जबकि केवल लगभग 3 प्रतिशत घर कच्चे या अर्धपक्के हैं।

लेकिन आदिवासी जिलों की स्थिति राज्य के औसत से अलग है। दाहोद, छोटा उदयपुर, नर्मदा, डांग, तापी, महीसागर, अरवल्ली, वलसाड और साबरकांठा के कई क्षेत्रों में कच्चे और अर्धपक्के मकानों का अनुपात अभी भी अधिक है।

अनुमानों के अनुसार गुजरात में लगभग 10 से 11 लाख अनुसूचित जनजाति (ST) परिवार रहते हैं।

श्रेणी अनुमानित प्रतिशत
पक्के घरों में रहने वाले ST परिवार 65–80%
कच्चे/अर्धपक्के घरों में रहने वाले परिवार 20–35%
आवास सहायता की आवश्यकता वाले परिवार 2–5 लाख

पीएम आवास योजना का प्रभाव

प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के तहत गुजरात में अनुसूचित जनजाति परिवारों के लिए 3.55 लाख से अधिक घर बनाए जा चुके हैं।

इसके बावजूद विशेषज्ञों का अनुमान है कि लगभग 2 से 3 लाख आदिवासी परिवारों को अभी भी नए घर या घरों के उन्नयन की आवश्यकता हो सकती है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2016-17 से 2024-25 के बीच गुजरात को 8,38,396 ग्रामीण घरों का लक्ष्य मिला था, जिनमें से 8,29,221 घरों को मंजूरी दी गई।

2026 तक लगभग 7 लाख घर पूरे किए जा चुके हैं, जिन पर कुल ₹9,083.68 करोड़ खर्च हुए।

2026 में 38 हजार घरों का वितरण

29 मार्च 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात में लगभग 38,000 आवास लाभार्थियों को घर सौंपे थे।

सरकारी जानकारी के अनुसार इनमें लगभग 70 प्रतिशत घर आदिवासी क्षेत्रों में स्थित थे।

हालांकि यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी गई, लेकिन उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि सभी पात्र आदिवासी परिवारों को आवास उपलब्ध कराने का लक्ष्य अभी पूरी तरह हासिल नहीं हुआ है।

जिला-वार स्थिति

पंचमहाल जिले में सबसे अधिक घरों का निर्माण हुआ।

जिला निर्मित घर खर्च
पंचमहाल 10,572 ₹179.18 करोड़
महीसागर 3,222 ₹54.57 करोड़
नर्मदा 2,367 ₹39.69 करोड़
दाहोद 1,804 ₹30.57 करोड़
साबरकांठा 1,717 ₹28.89 करोड़
छोटा उदयपुर 1,694 ₹28.45 करोड़
अरवल्ली 1,556 ₹24.31 करोड़
तापी 949 ₹15.88 करोड़
सूरत 933 ₹15.29 करोड़
वलसाड 834 ₹13.37 करोड़
बनासकांठा 699 ₹11.56 करोड़
डांग 678 ₹9.95 करोड़
नवसारी 627 ₹9.70 करोड़

अभी कितना सफर बाकी?

गुजरात की आवास कहानी उपलब्धियों और चुनौतियों दोनों को दर्शाती है।

एक ओर लाखों ग्रामीण परिवारों को पक्के घर मिले हैं और राज्य में पक्के मकानों का अनुपात तेजी से बढ़ा है।

दूसरी ओर आदिवासी क्षेत्रों में गरीबी, भौगोलिक कठिनाइयों, भूमि संबंधी समस्याओं और बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण आवास का लक्ष्य अभी पूरी तरह हासिल नहीं हुआ है।

उपलब्ध अनुमानों के अनुसार आज भी 2 से 3 लाख आदिवासी परिवारों को सुरक्षित और स्थायी आवास की आवश्यकता हो सकती है।

करीब दो दशक पहले किया गया वादा—हर गरीब परिवार को घर—अब भी गुजरात के आदिवासी क्षेत्रों में पूरी तरह साकार होने की प्रतीक्षा कर रहा है।