11 जून 2026 | गांधीनगर: गुजरात के मुख्यमंत्री Bhupendra Patel द्वारा प्रधानमंत्री Narendra Modi के प्रधानमंत्री पद के 12 वर्ष पूरे होने पर जारी किए गए चार पन्नों के बधाई पत्र को लेकर राजनीतिक बहस शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री ने पत्र में मोदी सरकार की उपलब्धियों और गुजरात को मिले विकास कार्यों का उल्लेख किया है, जबकि विपक्षी दलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कई दावों पर सवाल उठाए हैं।
मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में मोदी सरकार के 12 वर्षों को विकास, विश्वास और जनकल्याण का काल बताते हुए नर्मदा परियोजना, वाइब्रेंट गुजरात, गिफ्ट सिटी, धोलेरा, नवीकरणीय ऊर्जा, बुलेट ट्रेन और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को गुजरात के विकास की बड़ी उपलब्धियां बताया है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं।
हालांकि, विपक्ष का कहना है कि नर्मदा नहर नेटवर्क अब भी पूरी तरह तैयार नहीं हुआ है और वास्तविक सिंचाई के आंकड़ों को लेकर पारदर्शिता की कमी है। उनका दावा है कि सौराष्ट्र और कच्छ के कई क्षेत्रों में किसान आज भी पानी की समस्याओं का सामना कर रहे हैं।
विपक्षी नेताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि कच्छ और अन्य क्षेत्रों में सौर एवं पवन ऊर्जा परियोजनाओं तथा ट्रांसमिशन लाइनों के लिए बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण किया जा रहा है, जबकि प्रभावित किसानों को पर्याप्त मुआवजा नहीं मिल रहा है।
गिफ्ट सिटी और धोलेरा परियोजनाओं को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आलोचकों का कहना है कि इन परियोजनाओं को वैश्विक सफलता के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, लेकिन रोजगार, निवेश और आबादी के मामले में अपेक्षित परिणाम अभी तक नहीं मिले हैं।
विपक्ष ने यह भी याद दिलाया कि वर्ष 2014 से पहले भाजपा ने गुजरात के लगभग 130 लंबित मुद्दों की सूची जारी की थी। उनका कहना है कि केंद्र और राज्य दोनों में भाजपा की सरकार होने के बावजूद इनमें से कई मुद्दे अब भी लंबित हैं।
इनमें पश्चिम रेलवे का मुख्यालय, अहमदाबाद और सूरत को मेट्रो सिटी का दर्जा, पाकिस्तान द्वारा पकड़े जाने वाले मछुआरों का मुद्दा, कच्छ सीमा पर पूर्ण फेंसिंग, हजीरा कोस्ट गार्ड स्टेशन तथा कृषि और आपदा राहत से जुड़े कई विषय शामिल हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री के बधाई पत्र ने एक ओर मोदी सरकार की उपलब्धियों को चर्चा में ला दिया है, वहीं दूसरी ओर गुजरात के लंबित मुद्दों और विकास मॉडल को लेकर बहस भी तेज कर दी है।
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