गुजरात- खावड़ा से अदानी की 30 GW बिजली, पावर कॉरिडोर के बीच मुआवजे पर किसानों का विरोध

खावड़ा से पूरे देश में पहुंचेगी 30 GW बिजली: 1,600 किमी से अधिक ट्रांसमिशन नेटवर्क, मुआवजे को लेकर किसानों में असंतोष

अहमदाबाद/भुज, 11 जून 2026: कच्छ के खावड़ा में विकसित किया जा रहा 30 गीगावाट क्षमता वाला अक्षय ऊर्जा पार्क दुनिया की सबसे बड़ी हाइब्रिड सोलर-विंड परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है। यह परियोजना केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों तक बिजली पहुंचाने के लिए 765 kV अति उच्च वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइनों का विशाल नेटवर्क भी तैयार किया जा रहा है।

यदि परियोजना अपनी पूर्ण 30,000 मेगावाट क्षमता तक पहुंचती है, तो इससे प्रतिवर्ष लगभग 262.8 अरब यूनिट बिजली का उत्पादन हो सकता है। औसतन ₹4 प्रति यूनिट की दर से बिक्री होने पर वार्षिक आय लगभग ₹1.05 लाख करोड़ तक पहुंच सकती है, जबकि ₹5 प्रति यूनिट की दर पर यह बढ़कर ₹1.31 लाख करोड़ तक जा सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार यदि 50 प्रतिशत प्लांट लोड फैक्टर (PLF) माना जाए तो वार्षिक उत्पादन लगभग 131.4 अरब यूनिट रहेगा। इस स्थिति में संभावित वार्षिक आय ₹52,560 करोड़ से ₹65,700 करोड़ के बीच हो सकती है।

देशभर में बिजली पहुंचाने के लिए विशाल नेटवर्क

खावड़ा पार्क में उत्पादित बिजली किसी एक शहर या जिले को सीधे नहीं दी जाएगी। इसके बजाय इसे राष्ट्रीय ग्रिड में डाला जाएगा, जहां से गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर भारत के राज्यों में वितरण किया जाएगा।

इसके लिए खावड़ा से कई 765 kV डबल सर्किट ट्रांसमिशन लाइनें विकसित की जा रही हैं।

मुख्य मार्गों में खावड़ा-भुज लाइन शामिल है, जो कच्छ के बड़े रण और दिनारा-लोरिया क्षेत्र से होकर भुज पूलिंग सबस्टेशन तक पहुंचती है। इसकी लंबाई लगभग 220 किलोमीटर है।

खावड़ा-लाकड़िया कॉरिडोर दूसरी महत्वपूर्ण लाइन है, जो अंतर-राज्यीय ट्रांसमिशन प्रणाली से जुड़ती है। लगभग 298 किलोमीटर लंबी यह लाइन केंद्रीय ग्रिड की महत्वपूर्ण कड़ी मानी जाती है।

खावड़ा-राधनपुर-बनासकांठा लाइन के माध्यम से बिजली राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर भारत के राज्यों तक पहुंचाने की योजना है।

1,613 किलोमीटर लंबा ट्रांसमिशन नेटवर्क

उपलब्ध योजनाओं के अनुसार खावड़ा से निकलने वाली प्रमुख 765 kV ट्रांसमिशन लाइनों की कुल लंबाई लगभग 1,613 किलोमीटर होगी।

मार्गलंबाई
खावड़ा – हलवद301 किमी
खावड़ा – वटामण407 किमी
खावड़ा – लाकड़िया333 किमी
खावड़ा – बनासकांठा340 किमी
खावड़ा – अमरेली232 किमी
कुल1,613 किमी

मोरबी-हलवद क्षेत्र में किसानों का विरोध

खावड़ा परियोजना से जुड़ी कुछ ट्रांसमिशन लाइनों को लेकर मोरबी और हलवद क्षेत्र के किसानों ने विरोध दर्ज कराया है।

स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार जेतपर सहित लगभग 10 गांवों के करीब 150 किसान मुआवजे और भूमि पर प्रभाव को लेकर आपत्ति जता रहे हैं।

किसानों का कहना है कि उच्च वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइनें कृषि गतिविधियों और भूमि के मूल्य पर असर डालती हैं, जबकि मुआवजा पर्याप्त नहीं है।

एक टावर से कितनी भूमि प्रभावित होती है?

765 kV ट्रांसमिशन टावर सामान्य बिजली टावरों की तुलना में काफी बड़े होते हैं।

मदअनुमानित क्षेत्र
टावर आधार400–900 वर्ग मीटर
सुरक्षा/कार्य क्षेत्र1,000–2,500 वर्ग मीटर
RoW कॉरिडोर चौड़ाई67–85 मीटर

मुआवजा कैसे तय होता है?

गुजरात सरकार ने 2022 में ट्रांसमिशन कॉरिडोर के लिए राइट ऑफ वे (RoW) मुआवजा 7.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया था।

मुआवजे में सामान्यतः शामिल हैं:

  • ट्रांसमिशन कॉरिडोर के लिए भूमि मूल्य का 15 प्रतिशत तक
  • टावर आधार के नीचे आने वाली भूमि का अलग मुआवजा
  • फसल नुकसान का मुआवजा
  • पेड़ों का मुआवजा
  • मकान, कुएं, बाड़ या अन्य संरचनाओं को हुए नुकसान का मुआवजा

भारत के हरित ऊर्जा परिवर्तन का केंद्र

खावड़ा अक्षय ऊर्जा पार्क को भारत की स्वच्छ ऊर्जा क्रांति का प्रमुख केंद्र माना जा रहा है। हालांकि परियोजना के विस्तार के साथ भूमि अधिग्रहण, मुआवजा, पर्यावरणीय प्रभाव और स्थानीय समुदायों के अधिकारों से जुड़े मुद्दे भी चर्चा में हैं।

30 GW क्षमता प्राप्त होने पर खावड़ा दुनिया के सबसे बड़े अक्षय ऊर्जा केंद्रों में शामिल हो सकता है, लेकिन इसके साथ जुड़े सामाजिक और आर्थिक प्रश्नों का समाधान भी उतना ही महत्वपूर्ण रहेगा।