गुजरात में अंजीर (Fig) की खेती – संकलित जानकारी
अंजीर के बारे में
अंजीर (Fig) एक मूल्यवान फल है जो स्वास्थ्य और खेती दोनों के लिए लाभकारी माना जाता है। यह शहतूत (Mulberry) परिवार का पौधा है। अंजीर पोषक तत्वों और खनिजों का अच्छा स्रोत माना जाता है। इसमें प्राकृतिक शर्करा अधिक मात्रा में होती है।
मुख्य विशेषताएँ:
- दो वर्ष बाद उत्पादन शुरू होता है
- 4–5 वर्ष पुराने पौधों से लगभग 15 किलोग्राम फल मिल सकते हैं
- पौधे की उम्र बढ़ने के साथ उत्पादन बढ़ता है
- 20–30 वर्षों तक फल प्राप्त हो सकते हैं
- गर्म और शुष्क जलवायु इसके लिए उपयुक्त मानी जाती है
गुजरात में अंजीर की खेती (2024–25)
| क्षेत्र | क्षेत्रफल (हेक्टेयर) | उत्पादन (टन) | उत्पादकता (टन/हेक्टेयर) |
|---|---|---|---|
| उत्तर गुजरात | 3 | 25 | 8.25 |
| मध्य गुजरात | 3 | 20 | 6.67 |
| दक्षिण गुजरात + कच्छ | 18 | 80 | 4.44 |
| सौराष्ट्र | 44 | 302 | 6.86 |
| कुल गुजरात | 68 | 427 | 6.28 |
अतिरिक्त जानकारी:
- निजी संस्थाओं के अध्ययन के अनुसार, गैर-पंजीकृत किसानों को शामिल करने पर कुल क्षेत्र लगभग 900 हेक्टेयर होने का अनुमान है।
- अनुमानित कुल उत्पादन: 10,000 टन
गुजरात में अंजीर की खेती करने वाले किसान
| जिला | किसान | विवरण |
|---|---|---|
| महेसाणा | वरसंगजी कडवाजी ठाकोर | घुमासन गांव, 2 विघा में 370 पौधे |
| महेसाणा | दिनेश पंचाल | बहुचराजी, लगभग 2000 पौधों की प्राकृतिक खेती |
| अरवल्ली | विशाल पटेल | नई बोरल गांव, जैविक अंजीर खेती |
| सुरेंद्रनगर | कटुडा गांव के 2 किसान | 40 विघा में प्राकृतिक खेती |
| अमरेली | दिनेश सवसैया | मोटा आंकडिया गांव, 4 एकड़ में 3400 पौधे, 2025 में लगभग ₹22 लाख आय |
पालिताणा क्षेत्र की खेती का उदाहरण
स्थान: पालिताणा – सोंदा
विवरण:
- क्षेत्र: 10 विघा
- पौधों की उम्र: 9 महीने
- किस्में:
- डायना
- पुणे पुरंदर
- सिंचाई:
- ड्रिप सिंचाई
भूमि और जलवायु
उपयुक्त भूमि:
- अच्छी जल निकासी वाली भूमि
- मध्यम काली मिट्टी
- गोराडू मिट्टी
- हल्की क्षारीय भूमि
उपयुक्त जलवायु:
- गर्म और शुष्क क्षेत्र
- कम आर्द्रता वाले क्षेत्र
गुजरात में विशेष रूप से:
- सौराष्ट्र
- कच्छ
- उत्तर गुजरात
उत्पादन
- एक पौधे से: 150–250 फल
- एक पेड़ से: 20–25 किलोग्राम फल
- प्रति हेक्टेयर: 8000–10000 किलोग्राम उत्पादन
आय:
- एक पौधे से लगभग ₹700–₹1000 तक उत्पादन मूल्य
प्रमुख किस्में
भारत में उगाई जाने वाली मुख्य व्यावसायिक किस्में:
- पुणे अंजीर
- ब्लैक इलायची
- ब्राउन टर्की
- टर्किश व्हाइट
- काबुल
- मिशन
दुनिया में लगभग:
- 800–900 किस्में
पौधरोपण
रोपण समय:
- जुलाई–अगस्त
गड्ढे का आकार:
- 60 × 60 × 60 सेमी
पौधों के बीच दूरी:
- 4.5–5 मीटर
सिंचाई
वर्षभर:
- 14–17 सिंचाई
अंतराल:
- सर्दी: 16–18 दिन
- गर्मी: 6–8 दिन
- वर्षा ऋतु: आवश्यकता अनुसार
ड्रिप सिंचाई उपयोगी मानी जाती है।
अंतरवर्ती फसलें
पहले 2–3 वर्षों तक:
- दलहन
- बैंगन
- मिर्च
- टमाटर
- भिंडी
- ग्वार
प्रमुख कीट और रोग
- तना छेदक इल्ली
- तना सड़न रोग
- पत्तियों पर भूरे धब्बे
- फल मक्खी
- पक्षियों से नुकसान
मूल्य संवर्धन
अंजीर से बनने वाले उत्पाद:
- जैम
- जेली
- चटनी
- कैंडी
- हनी आधारित उत्पाद
- ड्रायफ्रूट मिठाई
कुछ किसान लगभग 28 प्रकार के मूल्यवर्धित उत्पाद भी बना रहे हैं।
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